भारत के लिए चुनौती भरी न्यूट्रैलिटी: इरान युद्ध और गैस संकट

भारत के लिए चुनौती भरी न्यूट्रैलिटी: इरान युद्ध और गैस संकट
द्वारा swapna hole पर 26.03.2026

इरान युद्ध की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई थी, लेकिन इसका असर सीधे भारतीय रसोई तक पहुँच गया। 28 फरवरी, 2026 को जब अमेरिका और इजरायल ने इरान पर हमले शुरू किए, तो नई दिल्ली ने तुरंत अपना 'तटस्थ' रुख अपनाने का फैसला किया। हालाँकि, यह संतुलन बनाना आसान नहीं रहा। एक ओर घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा था, तो दूसरी ओर ऊर्जा आपूर्ति में भारी गडबड़ी हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ कोई युद्ध नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक भूमिका पर सबसे बड़ा परीक्षण साबित हुआ।

दिप्लोमैटिक डांस और घरेलू असहमति

संघर्ष की शुरुआत से लेकर मार्च के अंत तक, भारत सरकार की विदेश नीति में एक जटिलता देखने को मिली। नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री of भारत सरकार ने गुलफ के कई नेताओं से बातचीत की, जिनमें कुत्त अब्दुल्ला द्वितीय और मुहम्मद بن सलमान शामिल थे। इन बातचीत का उद्देश्य तनाव कम करना था, लेकिन Opposition पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसे जोरदार रूप से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि एआईसी (AI) और इजरायल द्वारा हुए हमलों की न्यायालयी धड़कनों में स्पष्ट रूप से इरान का नाम न लेने पर सरकार को लक्षित किया जाना चाहिए।

यहाँ स्थिति यह है कि विदेश मंत्रालय ने 3 मार्च को एक कठोर बयान जारी किया था, जिसमें वे चाहते थे कि सभी पक्ष सीमा बनाए रखें। फिर भी, अयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद बाहरी कार्यवाही विभाग (MEA) के बयान में मौत के पीछे की वजह का जिक्र नहीं किया गया। कूटनीजी भाषा में इसे 'सावधानी' कह सकते हैं, लेकिन आम लोग इसे 'झूठ' समझ रहे थे।

ऊर्जा संकट और ईंधन की अनदेहगिरी

युद्ध का सबसे बड़ा प्रभाव घरों तक पहुंचा। जैसे ही अमेरिका और इजरायल ने हमले किए, इरान ने स्ट्रेट ऑफ हर्मूज़ को अपने कंट्रोल में लिया या उसकी व्यवस्था पूरी तरह बंद कर दी। इसके परिणामस्वरूप, भारत के कुल 90 प्रतिशत एलपीजी (LPG) आयात रोके गए।

  • 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़कर 14.2 किलोग्राम वाली गाइडिंग हो गई।
  • ब्लैक मार्केट में एक सिलेंडर 4,000 रुपये बेचा जाने लगा।
  • गुलफ क्षेत्र में काम कर रहे 1 करोड़ भारतीय वर्कर्स की सुरक्षा का सवाल उठा。

सियासियों की आलोचना के बीच, अमेरिकी खजाना मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत को अस्थायी रूप से रूसी तेल खरीदने की छूट दी। बदले में, उन्हें भविष्य में अमेरिकी तेल महंगे दरों पर खरीदने का वादा करना पड़ा। ट्राइकॉन्टिनेंटल एशिया (Tricontinental Asia) जैसी संस्थाओं ने इसे 'आर्थिक ब्लैकमेलेइंग' बताया।

समुद्री सुरक्षा और 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर'

युद्ध का सबसे संवेदनशील पड़ाव समुद्र था। मार्च 2026 में, भारतीय नौसैन्य अभ्यास से लौट रहे इराकियन नौसैनिक जहाज IRIS डेना को श्रीलंका के तट से लगभग 19 नॉटिकल मील दूर अमेरिकी जहाजों द्वारा नुकसान दिया गया। यह घटना भारत के 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' होने के दावे पर सबसे बड़ा प्रश्न चिह्न लग गई।

गाले, श्रीलंका के पास इस हमले ने पूरे क्षेत्र में गंभीरता पैदा कर दी। कई विशेषज्ञों ने कहा कि अगर यह क्षेत्र भारत की रणनीतिक पहुंच वाला है, तो देर से प्रतिक्रिया क्यों हुई? विदेश मंत्री एस. जायशांकर ने हालाँकि शांति स्थापित करने की कोशिश करते रहने का दावा किया।

आगे क्या? (What's Next)

आगे क्या? (What's Next)

25 मार्च, 2026 तक, स्थिति और अधिक बिगड़ गई। इरान ने अमेरिका के 15-प्वाइंट सुझाव को ठुकरा दिया और अपनी पंच शर्तें रख दीं। साथ ही, हेज़्बोल्लाह की ओर से उत्तरी इजरायल पर रॉकेट हमले शुरू हो गए। भारत अब केवल एक 'स्टेकहोल्डर' नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक भूराजनीति में एक 'स्टेबिलाइजर' बनने की दिशा में बढ़ रहा है। इरान ने भी भारत को 'बिश्वास योग्य खिलाड़ी' बताते हुए बातचीत में शामिल करने की आशा जताई है।

Frequently Asked Questions

इस संघर्ष से भारत के घरेलू उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?

सबसे बड़ा असर गैस सिलेंडर की कीमत पर पड़ा है। स्ट्रेट ऑफ हर्मूज़ बंद होने से आयात पर 90% रुकावट आई है। सामान्य भाषण में, घरेलू गैस महंगी होगी और ब्लैक मार्केट में कीमतें 4000 रुपये तक पहुँच चुकी हैं।

भारत की विदेश नीति अभी किस पर आधारित है?

भारत 'सिंपल न्यूट्रैलिटी' के माध्यम से चल रहा है। सरकार ने न तो अमेरिका-इजरायल को समर्थन दिया और न ही इरान पर स्पष्ट निंदा की। मुख्य प्राथमिकता गुलफ में रह रहे 1 करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा है।

IRIS डेना जहाज का ध्वंस क्यों हुआ?

भारतीय नौसैनिक अभ्यास से लौट रहे इस जहाज को अमेरिका ने श्रीलंका के तट से 19 समुद्री मील दूर नष्ट किया गया। इसने भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं पर सवाल खड़े किए हैं।

क्या शांति वार्ता संभव है?

इरान ने अमेरिका की शांति योजना को खारिज कर दिया है। हालांकि, तेहरान ने पांच शर्तें रखी हैं। भारत को एक मध्यस्थ के रूप में इरान ने 'भरोसेमंद खिलाड़ी' बताया है।