राहुल गांधी का 54वां जन्मदिन और मछली की चर्चा
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 19 जून 2024 को अपना 54वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर उन्हें चारों ओर से शुभकामनाओं का तांता लगा रहा, लेकिन एक विशेष बधाई जो सबका ध्यान खींची, वह थी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव की। तेजस्वी यादव ने राहुल गांधी को बधाई देते हुए उनकी 'अद्भुत दृष्टि और नेतृत्व' की तारीफ की। इसकी प्रतिक्रिया में, राहुल गांधी ने बड़े ही आत्मीयता से धन्यवाद दिया और सुझाव दिया कि अगली बार जब वे मिलें, तो वे कतला या रोहू मछली का आनंद लें।
तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की पुरानी मित्रता
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने भोजन के माध्यम से अपने बीच की नजदीकियों को जाहिर किया है। इससे पहले, राहुल गांधी ने दिल्ली में लालू प्रसाद यादव के घर पर 'चम्पारण मटन' का स्वाद चखा था। यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच के संबंधों को और भी मजबूती प्रदान करने वाली रही।
तेजस्वी यादव की मजेदार टिप्पणी और राजनीतिक साज़िश
इतना ही नहीं, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पहले भी विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर कई बार भोजन कर चुके हैं। ऐसे ही एक मौके पर, तेजस्वी यादव ने मजाक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गले में मछली का कांटा फंसने की बात कही। इस मजाकिया टिप्पणी ने विपक्षी दलों के बीच एक खास माहौल बना दिया था।
बीजेपी और नवरात्रि के दौरान मछली खाने पर हुआ विवाद
तेजस्वी यादव की मछली खाने की आदत ने राजनीतिक आलोचनाओं को भी जन्म दिया। अप्रैल 2024 में, नवरात्रि के दौरान मछली खाने के लिए बीजेपी ने तेजस्वी यादव की तीव्र आलोचना की थी। बीजेपी नेताओं ने इसे धार्मिक असंवेदनशीलता के रूप में प्रस्तुत किया था, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया था।
भविष्य में भोजन की योजनाएं
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने भविष्य में भी एक-दूसरे के साथ भोजन करने की योजनाएं बनाई हैं। उन्होंने एक-दूसरे को उनके पसंदीदा खाने से आवभगत करने का संकल्प लिया है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि दोनों नेताओं के बीच की यह भोजन चर्चा, राजनीतिक संबंधों को और भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं के बीच इस प्रकार के प्रेमालाप और दोस्ताना संबंध भारतीय राजनीति में एक नई दिशा प्रदान करते हैं। यह देखने योग्य होगा कि आने वाले समय में इन दोनों नेताओं के बीच की ऐसी मुलाकातें और किस प्रकार की राजनीतिक परिणामों का हिस्सा बनेंगी।
टिप्पणि
md najmuddin
मछली खाने की बात हो रही है तो बस यही काफी है 🐟😎 राहुल और तेजस्वी का ये दोस्ताना अंदाज़ बहुत अच्छा लगा।
Ravi Gurung
कतला या रोहू... ये तो बिल्कुल बिहार के लोगों के दिल की आवाज़ है। इन दोनों के बीच जो रिश्ता है वो राजनीति में बहुत कम मिलता है।
SANJAY SARKAR
क्या असल में ये सब राजनीति का हिस्सा है या बस दो दोस्त एक दूसरे के साथ खाना खाने के लिए मिल रहे हैं? कोई बड़ा मकसद तो नहीं?
Ankit gurawaria
सुनो भाईयो, ये बस मछली की बात नहीं है... ये तो एक नए तरीके की राजनीति की शुरुआत है। जहां आप दुश्मन नहीं, बल्कि दोस्त बन सकते हो बिना किसी नारे के, बिना किसी ट्वीट के, बस एक भोजन के साथ। कतला का टुकड़ा, रोहू का सूप, और दिलों का जुड़ाव। ये वो चीज़ है जिसे हम भारत में बहुत कम देखते हैं। ये नहीं कि आपको एक तरफ़ का रंग पसंद है, तो दूसरे का खाना नहीं खाना चाहिए। ये तो इंसानियत की बात है। और अगर इसे राजनीति में लाया जाए तो ये देश के लिए बहुत बड़ी बात होगी।
AnKur SinGh
इस प्रकार के व्यक्तिगत संबंधों के माध्यम से राजनीतिक सहयोग का निर्माण करना, विशेष रूप से एक विविध और धार्मिक रूप से संवेदनशील देश में, एक अत्यंत सूक्ष्म और उचित दृष्टिकोण है। भोजन के माध्यम से सांस्कृतिक समझ और सहिष्णुता को बढ़ावा देना, एक विश्वसनीय और स्थायी राजनीतिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करता है। यह एक उदाहरण है जिसे अन्य राजनीतिक दलों को अपनाना चाहिए।
Sanjay Gupta
अरे भाई, अब राजनीति में मछली खाने की बात हो रही है? नवरात्रि में जब लोग व्रत रख रहे हैं, तो ये लोग चार दिन में एक बार बिहार की मछली खाने की बात कर रहे हैं। इनकी धार्मिक भावनाओं का क्या होगा? ये सब बस लोगों को भ्रमित करने की चाल है।
Kunal Mishra
क्या यह सच में राजनीति है या एक टीवी शो का एपिसोड? दो नेता एक दूसरे के साथ मछली खाने की योजना बना रहे हैं, और आप सब इसे 'राजनीतिक संकेत' कह रहे हैं। शायद ये सिर्फ़ दो आदमी हैं जिन्हें खाना पसंद है। आप लोग इतने गहरे विश्लेषण क्यों कर रहे हैं? यह बस एक भोजन है, न कि एक राष्ट्रीय रणनीति।
Anish Kashyap
ये दोनों भाई बहुत अच्छे हैं बस खाना खाते हैं और दिल से बात करते हैं बाकी सब बकवास है ये राजनीति की नहीं इंसानियत की बात है
Poonguntan Cibi J U
मैं तो बस यही सोच रहा हूँ कि अगर ये दोनों एक दूसरे के साथ रोहू खाते हैं तो क्या उनके बीच की राजनीति भी नरम हो जाएगी? क्या ये एक नए तरीके से देश को बचा सकते हैं? मैंने तो सोचा भी नहीं था कि एक मछली का टुकड़ा इतना बड़ा मायने रख सकता है। क्या अगर हम सब भी एक दूसरे के साथ खाना खाएं तो ये देश बदल जाएगा? क्या ये सच में हो सकता है? मैं तो इस बात पर रो रहा हूँ।