सावन के पहले सोमवार को लाखों शिवभक्तों ने किया जलाभिषेक

सावन के पहले सोमवार को लाखों शिवभक्तों ने किया जलाभिषेक
द्वारा swapna hole पर 23.07.2024

सावन के पहले सोमवार का धार्मिक महत्व

सावन के पहले सोमवार का हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व है। यह वह समय होता है जब लाखों श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए देश के विभिन्न मंदिरों में एकत्रित होते हैं। गोंडा, उत्तर प्रदेश के मंदिरों में इस बार भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जो अपने आराध्य को प्रसन्न करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए जोर-शोर से जुटी।

जलाभिषेक का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में जलाभिषेक का विशेष महत्व है। इस अनुष्ठान के तहत भक्तजन पवित्र जल भगवान शिव को अर्पित करते हैं। माना जाता है कि इससे शांति, समृद्धि और सद्गुण की प्राप्ति होती है। यह प्रक्रिया श्रद्धालुओं के मन में एक विशेष प्रकार की आस्था और विश्वास उत्पन्न करती है। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह महीना उन्हीं को समर्पित होता है।

गोंडा के मंदिरों में भक्तों की उमड़ी भीड़

गोंडा के विभिन्न मंदिरों में इस बार भी श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखने को मिला। लोग पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मंदिर पहुंचे और भगवान शिव की आराधना की। मंदिर प्रांगण में भक्तों के धार्मिक गीत और भजनों की आवाज गूंज रही थी। ऐसे माहौल में हर कोई खुद को भगवान शिव के नजदीक महसूस कर रहा था।

भक्तों की आस्था और विश्वास

इस आयोजन ने लोगों की गहरी आस्था और विश्वास को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया। लाखों की संख्या में भक्त अपनी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए और पूरे उमंग और जोश के साथ भाग लिया। यह एक ऐसा दृश्य था, जिसने सभी को एकबारगी धार्मिक भावनाओं में बहने पर मजबूर कर दिया।

धार्मिक अनुष्ठान के पुनरुत्थान का संकेत

सावन के पहले सोमवार को गोंडा में लाखों भक्तों द्वारा जलाभिषेक के इस आयोजन ने न केवल उनकी आस्था को प्रदर्शित किया, बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों के पुनरुत्थान का संकेत भी दिया। इस मौके पर लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ जमा हुए और इस पवित्र अनुष्ठान में भाग लिया।

स्थानीय प्रशासन और धार्मिक संगठनों का योगदान

इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन और धार्मिक संगठनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मंदिर के प्रबंधकों ने सुनिश्चित किया कि सभी भक्तजन आसानी से पूजा-अर्चना कर सकें और किसी प्रकार की असुविधा न हो। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी पूरी व्यवस्था कड़ी थी, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी न हो।

भावी पीढ़ी के लिए संदेश

यह आयोजन एक मजबूत संदेश देता है कि धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व आज भी बरकरार है और नई पीढ़ी को भी इन्हें समझने और अपनाने की आवश्यकता है। यह आयोजन धार्मिक मूल्यों को संजोने और उन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

सावन के पहले सोमवार को गोंडा में हुए इस अनुष्ठान ने यह साबित कर दिया कि भगवान शिव के प्रति लोगों की भक्ति और श्रद्धा अटूट है। हजारों लोग इस मौके पर एकजुट हुए और अपनी आस्था का परिचय दिया।

टिप्पणि

Abhishek Abhishek
Abhishek Abhishek

ये सब बकवास है। भीड़ भरकर जल डालने से क्या बदलेगा? सरकार को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देनी चाहिए, न कि मंदिरों की भीड़ बढ़ानी।

जुलाई 23, 2024 AT 04:16
Avinash Shukla
Avinash Shukla

मैंने भी इस दिन गोंडा जाने की योजना बनाई थी... पर बारिश के कारण रद्द करनी पड़ी। 🌧️🙏 लेकिन घर पर शिवलिंग पर जल चढ़ाया। ऐसे दिनों में दिल शांत हो जाता है।

जुलाई 24, 2024 AT 12:21
Harsh Bhatt
Harsh Bhatt

अरे भाई, ये जलाभिषेक तो वैदिक काल से चला आ रहा है, लेकिन आजकल इसे एक ट्रेंड बना दिया गया है। जैसे इंस्टाग्राम पर फोटो डालने का चलन है, वैसे ही अब मंदिर में जल डालना भी एक सोशल मीडिया स्टेटस बन गया है। भक्ति या ब्रांडिंग? 🤔

जुलाई 25, 2024 AT 22:46
dinesh singare
dinesh singare

सुनो, ये सब धर्म का नाम लेकर लोगों को धोखा दिया जा रहा है। लाखों लोग भीड़ में गिर रहे हैं, पर किसी ने उनकी सुरक्षा के लिए क्या किया? ये मंदिर प्रबंधक तो बस भक्ति के नाम पर पैसे कमा रहे हैं। शिव भगवान नहीं, शिव बिजनेस है ये सब।

जुलाई 26, 2024 AT 17:03
Priyanjit Ghosh
Priyanjit Ghosh

अरे भाई, ये भीड़ देखकर लगा जैसे कोई फेस्टिवल हो गया हो! लोगों का जोश देखकर लगा मैं भी चलूं। लेकिन घर पर चाय पीते हुए देख रहा था। 😎

जुलाई 27, 2024 AT 17:09
Anuj Tripathi
Anuj Tripathi

मैंने भी अपने बाप के साथ इस दिन जलाभिषेक किया था और उन्होंने कहा था कि ये दिन हमारे पूर्वजों की याद दिलाता है। अब तो बस इतना ही याद रखना है कि धर्म बस भीड़ नहीं, दिल से होता है

जुलाई 27, 2024 AT 20:28
Hiru Samanto
Hiru Samanto

मैं भी गोंडा से हूँ... वहां का मंदिर तो बहुत पुराना है। लेकिन इस बार भीड़ इतनी ज्यादा नहीं थी जितनी पिछले साल। शायद लोगों को थोड़ा शांति चाहिए थी।

जुलाई 28, 2024 AT 16:09
Divya Anish
Divya Anish

इस धार्मिक अनुष्ठान के अतिरिक्त, स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रदान किये गए स्वच्छता, जल आपूर्ति एवं सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेखनीय योगदान रहा है। यह एक ऐसा आदर्श उदाहरण है जिसे अन्य राज्यों को अपनाना चाहिए।

जुलाई 29, 2024 AT 21:38
md najmuddin
md najmuddin

मैं तो बस देख रहा था... लोग बहुत खुश लग रहे थे। बच्चे भी नाच रहे थे। ये दृश्य देखकर लगा जैसे भारत का दिल अभी भी धड़क रहा है। 🙏

जुलाई 31, 2024 AT 02:13
Ravi Gurung
Ravi Gurung

मैंने सुना है कि ये जलाभिषेक वास्तव में पानी की बचत के लिए भी अच्छा है क्योंकि वो पानी बाद में बगीचों में इस्तेमाल हो जाता है। लेकिन इसके बारे में कोई नहीं बोलता।

जुलाई 31, 2024 AT 14:13
SANJAY SARKAR
SANJAY SARKAR

क्या ये जलाभिषेक वाकई में शिव को पसंद आता है या बस हमारा एक रितुअल है? मुझे लगता है दोनों कुछ न कुछ तो है।

अगस्त 2, 2024 AT 02:06
Ankit gurawaria
Ankit gurawaria

मैंने इस अवसर पर एक बड़ी बात समझी - जब लाखों लोग एक ही दिशा में दिल से जुड़ जाते हैं, तो वो एक ऐसा ऊर्जा का बहाव बन जाता है जो न सिर्फ धार्मिक बल्कि सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी एक अद्भुत अनुभव बन जाता है। ये कोई साधारण भीड़ नहीं, ये एक जीवंत जागृति है, जहां हर बूंद पानी एक आस्था का प्रतीक है, हर गीत एक आत्मा का अभिव्यक्ति है, और हर आंख में एक अनकहा संदेश है कि हम अकेले नहीं हैं।

अगस्त 2, 2024 AT 07:08
AnKur SinGh
AnKur SinGh

इस पवित्र अनुष्ठान के माध्यम से भारतीय संस्कृति के अद्वितीय आध्यात्मिक मूल्यों का पुनर्जागरण हुआ है। यह एक ऐसा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक है जिसे नवीन पीढ़ी को अपनाना चाहिए ताकि हमारी विरासत बरकरार रहे। इस तरह के अनुष्ठानों का समर्थन करना हमारा धार्मिक और सामाजिक कर्तव्य है।

अगस्त 3, 2024 AT 09:28
Sanjay Gupta
Sanjay Gupta

ये सब भारतीयों की अंधविश्वासी आदत है। अगर आज भी लोग इतने बेकार काम कर रहे हैं, तो हम कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। शिव भगवान तो ज्ञानी हैं - वो भीड़ नहीं, बुद्धि चाहते हैं।

अगस्त 4, 2024 AT 09:31
Kunal Mishra
Kunal Mishra

मुझे लगता है कि ये जलाभिषेक का दृश्य बस एक नाटक है। भीड़, भजन, बारिश... सब कुछ एक रियलिटी शो की तरह बनाया गया है। ये सब किसके लिए? शिव के लिए? या फिर टीवी चैनल के लिए?

अगस्त 6, 2024 AT 05:07
Anish Kashyap
Anish Kashyap

ये भीड़ देखकर लगा जैसे ब्रह्मांड का एक टुकड़ा यहां आ गया हो। जिंदगी में ऐसे दिन बहुत कम होते हैं जब लोग एक हो जाएं।

अगस्त 7, 2024 AT 03:45
Poonguntan Cibi J U
Poonguntan Cibi J U

मैं तो रो रहा था... देखा कि एक बूढ़ी दादी अपने बेटे के हाथ पकड़कर जल चढ़ा रही थी। उसकी आंखों में वो आस्था थी जो शायद मैं कभी नहीं पा पाऊंगा। अब तो मैं भी हर सोमवार घर पर जलाभिषेक करूंगा।

अगस्त 8, 2024 AT 17:13

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