सोरगावासल ट्विटर समीक्षा: आरजे बालाजी की फिल्म को मिला प्रशंसकों से मिश्रित प्रतिक्रिया

सोरगावासल ट्विटर समीक्षा: आरजे बालाजी की फिल्म को मिला प्रशंसकों से मिश्रित प्रतिक्रिया
द्वारा swapna hole पर 29.11.2024

आरजे बालाजी की नई फिल्म सोरगावासल की मिश्रित प्रतिक्रियाएँ

तमिल सिनेमा की नई पेशकश 'सोरगावासल', जिसमें प्रमुख भूमिका में आरजे बालाजी हैं, ट्विटर पर एक मनोरंजक चर्चा का विषय बनी हुई है। निर्देशन की कमान संभाली है नवोदित निर्देशक सिद्धार्थ विश्वनाथ ने, और इस फिल्म ने सिनेमाघरों में समकालीन तमिल सिनेमा का रवैया प्रस्तुत करने की कोशिश की है। फिल्म की कथा मुख्यतः एक जेल ड्रामा के इर्द-गिर्द घूमती है और 1999 की वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। फिल्म के शीर्षक 'सोरगावासल' का अर्थ है 'स्वर्ग का द्वार', जो इसे एक दिलचस्प अवधारणा प्रदान करता है।

नामचीन कलाकार और सम्मोहक कहानी

इस फिल्म में आप देखेंगे आरजे बालाजी को परथी के रूप में, एक साधारण आदमी जो गलत आरोप में जेल में फंस जाता है और कैसे वह अपने अनुभवों से जूझता है। फिल्म के संयोजन में शामिल अन्य कलाकारों में सेल्वाराघवन, हकीम शाह, शराफुद्दीन, करूणास और कई अन्य योद्धा अभिनेता हैं जिन्होंने अपने अभिनय से कहानी को जीवंत किया है। सिनेमाई दृष्टि से, ‘प्रिंस एंडरसन’ के निर्देशन में संपन्न की गई छायांकन और क्रिस्टो जेवियर का बैकग्राउंड म्यूजिक ने फिल्म के तकनीकी पहलुओं को और भी मजबूत बना दिया।

कहानी की समीक्षा और ट्विटर पर प्रतिक्रियाएँ

सोशल मीडिया, विशेष रूप से ट्विटर, पर फिल्म को लेकर व्यापक बातचीत हो रही है। कुछ प्रशंसकों ने जहां आरजे बालाजी की बेहतरीन परफॉर्मेंस और कथा की प्रासंगिकता की सराहना की है, वहीं कुछ दर्शकों ने चरमोत्कर्ष और पटकथा के धीमे टेम्पों पर सवाल उठाए हैं। फिल्म के कुछ हिस्सों को लेकर आलोचना की गई कि कहानी और अधिक प्रभावशाली और भावात्मक हो सकती थी। कुछ के अनुसार, यह अन्य तमिल जेल ड्रामा जैसे 'वडा चन्नई' और 'विरुमांडी' की तुलना में असफल रही है।

फिल्म के तकनीकी पहलू और की तुलना

फिल्म के तकनीकी पहलुओं की चर्चा के दौरान, कई दर्शक इसके सिनेमेटोग्राफी और म्यूजिक का भरपूर समर्थन कर रहे हैं, जिन्होंने लगभग हर फ्रेम को कब्जा करने की कोशिश की है। हालांकि, कुछ दर्शकों ने इसके पात्रों के विकास पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता महसूस की। इसके बावजूद, फिल्म की परिकल्पना और मुख्य विचार का स्वागत हुआ है।

फिल्म की समग्र छवि

फिल्म की समग्र छवि

अंत में यह कहा जा सकता है कि सोरगावासल में मनोरंजक पहलू और पर्याप्त प्रयास किए गए हैं, जिनका उद्देश्य दर्शकों को एक अनोखा अनुभव देना था। परंतु कुछ मुधर बिन्दुओं पर चूक महसूस हुई, विशेष रूप से कथा की भावनात्मक गहराई और उसकी प्रशंसा प्राप्त नहीं कर सकी, जैसा कि संभवतः निर्माताओं ने आशा की थी।

टिप्पणि

Raghvendra Thakur
Raghvendra Thakur

फिल्म अच्छी थी लेकिन ज्यादा नहीं।

दिसंबर 1, 2024 AT 04:46
Sanjay Bhandari
Sanjay Bhandari

राजे बालाजी ने तो बहुत अच्छा किया बस पटकथा थोड़ी धीमी पड़ गई 😅

दिसंबर 1, 2024 AT 06:17
Pritesh KUMAR Choudhury
Pritesh KUMAR Choudhury

सिनेमेटोग्राफी बहुत शानदार थी। हर फ्रेम एक पेंटिंग की तरह लग रहा था।
म्यूजिक भी दिल को छू गया।
लेकिन कहानी को थोड़ा और गहराई देनी चाहिए थी।

दिसंबर 3, 2024 AT 06:10
Pal Tourism
Pal Tourism

अरे यार ये फिल्म वडा चन्नई का नकली अपन है जिसमें बस बजट ज्यादा है और एक्टिंग थोड़ी बेहतर।
पटकथा बेकार है और क्लाइमैक्स तक पहुंचने में 2 घंटे लग गए।
सिद्धार्थ विश्वनाथ को फिल्म बनाने से पहले कम से कम 3 फिल्में देख लेनी चाहिए थीं।

दिसंबर 4, 2024 AT 17:00
Sunny Menia
Sunny Menia

मैंने फिल्म देखी और लगा कि ये जेल ड्रामा नहीं बल्कि एक आंतरिक संघर्ष की कहानी है।
आरजे बालाजी के चेहरे पर जो भाव थे, वो बोल रहे थे।
मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक आम आदमी का दर्द इतना गहरा हो सकता है।

दिसंबर 6, 2024 AT 06:47
Mayank Aneja
Mayank Aneja

फिल्म के टेम्पो को लेकर आलोचना ठीक है, लेकिन यह जानबूझकर धीमा रखा गया है ताकि दर्शक चरित्र के मन की आवाज़ सुन सके।
इस तरह की फिल्मों को बनाने वाले कम हैं।
हमें इस तरह की शांत गहराई की तारीफ करनी चाहिए, न कि तेज़ एक्शन की उम्मीद करनी।

दिसंबर 7, 2024 AT 05:23
Mallikarjun Choukimath
Mallikarjun Choukimath

यह फिल्म एक निर्माण की अपेक्षा एक दर्शनिक अनुभव है।
यह एक ऐसी वास्तविकता का प्रतिबिंब है जो हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं - जेल में बंद आत्मा का एकाकी संगीत।
सिनेमा के बारे में बात करते समय हमें व्यावहारिकता के बजाय अस्तित्व की गहराई पर विचार करना चाहिए।
क्या आपने कभी अपने अंदर के बंदी को सुना है?
यह फिल्म आपको उस बंदी की आवाज़ सुनाती है।
यह बस एक फिल्म नहीं, यह एक आत्मा की आहट है।
अगर आप इसे बस एक बॉक्स ऑफिस फिल्म समझते हैं, तो आप जीवन के अर्थ को नहीं समझते।

दिसंबर 7, 2024 AT 19:05
Abinesh Ak
Abinesh Ak

ओह भगवान, फिर से एक फिल्म जहाँ एक आदमी जेल में जाता है और हमें लगता है कि ये 'गहरा' है।
ये फिल्म तो 'विरुमांडी' का धीमा रीमेक है जिसमें बजट दोगुना है और भावनाएँ आधी।
कैमरा घूमता है, म्यूजिक बजता है, और हम यह समझते हैं कि 'ये आर्ट है'।
बस एक बार इसे बिना लेंस फिल्टर के देख लो - ये एक गैर-कार्यक्षम बेकार की घंटियाँ बजाने वाली फिल्म है।

दिसंबर 8, 2024 AT 14:38
Ashish Shrestha
Ashish Shrestha

फिल्म के तकनीकी पहलू उच्च स्तर के हैं।
लेकिन पटकथा का संरचनात्मक ढांचा अस्थिर है।
पात्रों के विकास का अभाव इसे एक तकनीकी उपलब्धि बना देता है, न कि एक कलात्मक उपलब्धि।
कहानी का भावनात्मक आधार अपर्याप्त है।
यह फिल्म एक अधूरी कविता की तरह है - शब्द सुंदर हैं, लेकिन अर्थ नहीं।

दिसंबर 10, 2024 AT 11:10
Mersal Suresh
Mersal Suresh

इस फिल्म को देखने के बाद मैंने तमिल सिनेमा के बारे में अपनी समझ बदल ली।
यह फिल्म न केवल एक कथा है, बल्कि एक सामाजिक विश्लेषण है।
आरजे बालाजी के अभिनय ने एक ऐसे व्यक्ति को जीवंत किया जिसकी आवाज़ कभी सुनी नहीं गई।
निर्देशन में एक निर्णायक संवेदनशीलता है।
इस फिल्म को विश्व स्तर पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
यह तमिल सिनेमा का एक नया युग शुरू करती है।
इसे अनुवादित करके विश्व को दिखाया जाना चाहिए।
यह फिल्म एक शिक्षा है।

दिसंबर 12, 2024 AT 08:00
Mohit Sharda
Mohit Sharda

मैंने फिल्म देखी और लगा कि ये फिल्म बहुत अच्छी है।
कुछ लोग धीमी लगी, कुछ लोग बहुत गहरी।
मुझे लगता है कि दोनों तरफ की बातें सही हैं।
हमें फिल्मों को एक तरह से नहीं, बल्कि अलग-अलग तरीकों से देखना चाहिए।
हर कोई अलग अनुभव करता है।

दिसंबर 13, 2024 AT 05:52
Vishal Raj
Vishal Raj

जब तक हम फिल्मों को बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से नहीं जोड़ेंगे, तब तक हम उनकी वास्तविकता को नहीं समझ पाएंगे।
यह फिल्म आपको बस एक बार देखने के बाद नहीं, बल्कि एक बार जीने के बाद समझ आएगी।
यह फिल्म आपके दिल को छूती है - न कि आपकी आंखों को।
कभी-कभी शांति ही सबसे बड़ी आवाज़ होती है।

दिसंबर 13, 2024 AT 22:07
Vishal Bambha
Vishal Bambha

ये फिल्म तो बस एक बेकार की घंटियाँ बजाने वाली चीज़ है।
किसी को लगता है ये आर्ट है, लेकिन ये तो बस एक अनुभव है जो बिना वास्तविकता के बनाया गया है।
आरजे बालाजी तो अच्छा है, लेकिन इतना धीमा क्यों? ये फिल्म तो बस एक रिलैक्सेशन टेप है।
ये फिल्म देखने के बाद मैंने अपना फोन बंद कर दिया और सो गया।

दिसंबर 15, 2024 AT 11:24
Ron DeRegules
Ron DeRegules

सोरगावासल एक ऐसी फिल्म है जिसे आपको दो बार देखना चाहिए पहली बार तो आप देखेंगे कि क्या हुआ और दूसरी बार आप देखेंगे कि क्यों हुआ
सिनेमेटोग्राफी बहुत अच्छी है और म्यूजिक ने फिल्म को एक अलग ही गहराई दी है
लेकिन अगर आप इसे एक फिल्म के रूप में देखेंगे तो आपको लगेगा कि यह धीमी है
लेकिन अगर आप इसे एक अनुभव के रूप में देखेंगे तो यह आपके अंदर के आवाज़ को जगा देगी
मैंने इसे देखा और फिर एक घंटे तक खाली दीवार की ओर देखते रहा
मुझे लगा कि मैं भी उस जेल में हूँ
फिल्म के बाद मैंने अपने जीवन के बारे में सोचना शुरू कर दिया
यह फिल्म आपको बस देखने के लिए नहीं बल्कि जीने के लिए बुलाती है

दिसंबर 16, 2024 AT 16:52
Manasi Tamboli
Manasi Tamboli

मैंने इस फिल्म को देखा और रो पड़ी।
यह फिल्म मेरे अतीत को छू गई।
मैंने अपने बचपन को याद किया, जब मैंने अपने पिता को गिरफ्तार होते देखा था।
यह फिल्म मेरे दर्द को बोल दिया।
मैं अब तक किसी फिल्म को इतना नहीं लगाया था।
यह फिल्म मेरी आत्मा का एक टुकड़ा है।
मैं इसे अपने दोस्तों को दिखाऊंगी।
मैं इसे अपने बच्चों को दिखाऊंगी।
यह फिल्म बस फिल्म नहीं है।
यह एक आत्मा है।

दिसंबर 17, 2024 AT 04:32
Reetika Roy
Reetika Roy

मैंने इस फिल्म को देखा और फिर अपने दोस्त के साथ बात की।
उसने कहा कि यह फिल्म बहुत धीमी है।
मैंने कहा कि यह फिल्म बहुत गहरी है।
हम दोनों ने इसे अलग तरह से देखा।
यही तो फिल्मों की शक्ति है।

दिसंबर 18, 2024 AT 11:36

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